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सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम तथा निर्यात प्रोत्साहन विभाग की कार्यकारी संस्था उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन निदेशालय है जो उत्तर प्रदेश के सर्वांगीण औद्योगिक विकास के लिए सरकारी नीतियों का कार्यान्वयन करती है| उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन निदेशालय प्रदेश के औद्योगिक उत्पादन और निवेश के लिए एक अनुकूल वातावरण प्रदान करने की दिशा में निरंतर प्रयासरत है ताकि राज्य औद्योगिक विकास के दृष्टिकोण से सर्वोच्च स्थान पर आ सके।

उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन निदेशालय का मुख्य लक्ष्य केंद्र सरकार एवं राज्य सरकार के कार्यक्रमों एवं योजनाओं को क्रियान्वित करते हुए औद्योगिक विकास को बढ़ावा देना एवं रोजगार का सृजन करना है।

श्री सिद्धार्थ नाथ सिंह

माननीय कैबिनेट मंत्री
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम एवं निर्यात प्रोत्साहन विभाग,उत्तर प्रदेश

चौधरी उदयभान सिंह

माननीय राज्य मंत्री
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम एवं निर्यात प्रोत्साहन विभाग,उत्तर प्रदेश

श्री नवनीत सहगल

प्रमुख सचिव
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम एवं निर्यात प्रोत्साहन विभाग, उत्तर प्रदेश

श्री गोविंदराजु एन.एस.

आयुक्त एवं निदेशक
उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन निदेशालय,उत्तर प्रदेश

मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना

प्रदेश के शिक्षित युवा बेरोजगारो को स्वरोजगार के अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना संचालित है। योजनान्तर्गत उद्योग स्थापना हेतु रु० 25.00 लाख तक एवं सेवा क्षेत्र हेतु रु० 10.00 लाख तक का ऋण बैंको के माध्यम से उपलब्ध कराया जाता है। राज्य सरकार द्वारा 25 प्रतिशत मार्जिन मनी उपलब्ध करायें जाने का भी प्रावधान है जो कि उद्योग क्षेत्र हेतु अधिकतम रु० 6.25 लाख तथा सेवा क्षेत्र हेतु अधिकतम रु० 2.50 लाख है। इस हेतु अभ्यर्थी को उ0प्र0 का मूल निवासी एवं हाई स्कूल उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। अभ्यर्थी की आयु 18 से 40 वर्ष के मध्य होनी चाहिए तथा वह किसी भी वित्तीय संस्थान से चूककर्ता(डिफाल्टर) नहीं होना चाहिए। योजनान्तर्गत गठित जिला स्तरीय चयन समिति के माध्यम से चयनित अभ्यर्थियों के आवेदन पत्रों को बैंक प्रेषित कर ऋण स्वीकृत एवं वितरित कराया जाता है।

एक जनपद एक उत्पाद मार्जिन मनी योजना

प्रदेश के शिक्षित युवा बेरोजगारो को स्वरोजगार के अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से एक जनपद एक उत्पाद मार्जिन मनी योजना संचालित है। योजनान्तर्गत उद्योग स्थापना हेतु रु० 25.00 लाख तक की परियोजना लागत का 25 प्रतिशत या अधिकतम रू 6.25 लाख, जो भी कम हो तक की वित्त पोषण सहायता प्रदान की जाएगी। योजनान्तर्गत उद्योग स्थापना हेतु रु० 50.00 लाख तक की परियोजना लागत का 20 प्रतिशत या अधिकतम रू 6.25 लाख, जो अधिक हो तक की वित्त पोषण सहायता प्रदान की जाएगी। योजनान्तर्गत उद्योग स्थापना हेतु रु० 150.00 लाख तक की परियोजना लागत का 10 प्रतिशत या अधिकतम रू 10 लाख, जो अधिक हो तक की वित्त पोषण सहायता प्रदान की जाएगी। योजनान्तर्गत उद्योग स्थापना हेतु रु० 150.00 लाख से अधिक की परियोजना लागत का 10 प्रतिशत या अधिकतम रू 20 लाख, जो अधिक हो तक की वित्त पोषण सहायता प्रदान की जाएगी। इस हेतु अभ्यर्थी को उ0प्र0 का मूल निवासी एवं हाई स्कूल उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। अभ्यर्थी की आयु 18 से 40 वर्ष के मध्य होनी चाहिए तथा वह किसी भी वित्तीय संस्थान से चूककर्ता(डिफाल्टर) नहीं होना चाहिए। योजनान्तर्गत गठित जिला स्तरीय चयन समिति के माध्यम से चयनित अभ्यर्थियों के आवेदन पत्रों को बैंक प्रेषित कर ऋण स्वीकृत एवं वितरित कराया जाता है।

एक जनपद एक उत्पाद प्रशिक्षण एवं टूलकिट योजना

प्रदेश के शिक्षित युवा बेरोजगारो को स्वरोजगार के अवसर प्रदान करने के उद्देश्य सेएक जनपद एक उत्पाद प्रशिक्षण एवं टूलकिट योजना संचालित है। कौशल विकास और टूल-किट वितरण योजना का उद्देश्य उत्तर प्रदेश में ओ.डी.ओ.पीउत्पादों की संपूर्ण मूल्य श्रृंखला में कुशल कार्यबल की वर्तमान और भविष्य की आवश्यकताओं को पूरा करना है। इसके अतिरिक्त, योजना के अन्तरगत कारीगरों / श्रमिकों को प्रासंगिक उन्नत टूल-किट का वितरण किया जायेगा। जो कारीगर पहले से ही कुशल हैं, उन्हें RPL (Recognition of Prior Learning) के माध्यम से आवश्यक प्रशिक्षण दिया जाएगा और उन्हें संबंधित क्षेत्र कौशल परिषदों (S.S.Cs) के माध्यम से प्रमाणित किया जाएगा। अकुशल कारीगरों को 10दिन का प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण उपरांतइन कारीगरों को आर.पी.एल के तहत प्रमाणित किया जाएगा। सभी प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण अवधि के दौरान रू 200/- प्रति दिन का मानदेय मिलेगा।

विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना,उ0प्र0

प्रदेश के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्र कारीगरों के विकास के लिए विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना चालू की गई है। इसके अंतर्गत इन लोगों को टोकरी बुनकर, कुम्हार, लोहार, राजमिस्त्री, दर्जी, बढ़ई, नाई, हलवाई, मोची व सुनार आदि ट्रेडों में प्रशिक्षण प्रदान कराया जाएगा। छह दिनों चलने वाली ट्रेन‍िंंग का सारा खर्च सरकार उठाएगी। फिलहाल जिले में जिला उद्योग केंद्र की ओर से ऐसे बेरोजगारों से आवेदन मांगे गए हैं। उनका चयन होने के बाद उन्हें प्रशिक्षण देकर अपने पैरों पर खड़ा करने के प्रयास किए जाएंगे। जनपद में इसके लिए ढाई सौ लोगों को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य रखा गया है।

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